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Friday, June 8, 2007

Gulzar shows flow of URDU Lang.


इश्क कि छाओं
पाऊँ के नीचे जन्नत होगी
जिनके सर हो इश्क कि छाओं

चल छैया छैया छैया छैया - २
छैया छैया छैया छैया
चल छैया छैया छैया छैया
चल छैया छैया छैया छैया - २
छैया छैया छैया छैया
चल छैया छैया छैया
सर इश्क कि छाओं चल छैया छैया
सर इश्क कि छाओं चल छैया
पाऊँ जन्नत चले चल छैया छैया
पाऊँ जन्नत चले चल छैया

चल छैया छैया छैया छैया - ४

वोह यार है जो खुशबु कि तरह
जिसकी जुबां उर्दू कि तरह


मेरी शाम रात, मेरी कायनात
वोह यार मेरा सैया सैया
चल छैया छैया छैया छैया - २

चल छैया छैया छैया छैया - २

गुल्पोश कभी इत्राये कहीँ महेके तो नज़र आ जाये कहीँ - २
ताविज़ बनाके पेहें उससे, आयत कि तरह मिल जाये कहीँ - २
गुल्पोश कभी इत्राये कहीँ महेके तो नज़र आ जाये कहीँ
ताविस बनाके पेहें उससे, आयत कि तरह मिल जाये कहीँ


(वोह यार है जो इमान कि तरह)
मेरा नगमा वोही, मेरा कलमा वोही
मेरा नगमा नगमा, मेरा कलमा कलमा
मेरा नगमा नगमा, मेरा कलमा कलमा - ३

यार मिसाले ओस चले,
पाऊँ के टेल फिर्दोस चले
कभी दाल दाल कभी पात पात
मैं हवा पे धून्दूं उसके निशाँ
सर इश्क कि छाओं चल छैया छैया
सर इश्क कि छाओं चल छैया
पाऊँ जन्नत चले चल छैया छैया
पाऊँ जन्नत चले चल छैया

चल छैया छैया छैया छैया - ४

मैं उसके रुप का शैदायी, वोह धुप छाओं सा हर्जायी
वोह शोख का रंग बदलता है, मैं रंग रुप का सौदाई

मैं रंग रुप का सौदाई

जिनके सर हो इश्क कि छाओं, पाऊँ के नीचे जन्नत होगी - २
शाम रात, मेरी कायनात, वोह यार मेरा सैया सैया

चल छैया छैया छैया छैया - ४

सर इश्क कि छाओं चल छैया छैया
सर इश्क कि छाओं चल छैया
पाऊँ जन्नत चले चल छैया छैया
पाऊँ जन्नत चले चल छैया

चल छैया छैया छैया छैया - ४

वोह यार है जो खुशबु कि तरह
वोह जिसकी जुबां उर्दू कि तरह
मेरी शाम रात, मेरी कायनात
वोह यार मेरा सैया सैया
चल छैया छैया छैया छैया - ४

चल छैया छैया छैया छैया - ४

छैया छैया छैया छैया
चल छैया छैया छैया छैया l

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