Search My Blog

Loading...

Wednesday, June 6, 2007

Lyrics of Title Song from Bharat Ek Khoj

सृष्टी से पहले सत्य नहीं था,
असत्य भी नहीं
अंतरिक्ष भी नहीं,
आकाश भीं नहीं था
छिपा था क्या कहाँ,
किसने देखा था
उस पल तो अगम,
अटल जल भी कहाँ था
सृष्टी का कौन हैं कर्ता
कर्ता हैं यह वा अकर्ता
ऊंचे आसमान में रहता
सदा अध्यक्ष बना रहता
वोहीं सच मुच में जानता.
या नहीं भी जानता
हैं किसी को नहीं पता
नहीं पता
नहीं है पता, नहीं है पता...........
वोह था हिरान्य गर्भ सृष्टी से पहले विद्यमान
वोही तो सारे भूत जात का स्वामी महान
जो है अस्तित्वमाना धरती आसमान धारण कर
ऐसे किस देवता कि उपासना करे हम अवि देकर
जिस के बल पर तेजोमय है अम्बर
पृथ्वी हरी भरी स्थापित स्थिर
स्वर्ग ओर सूरज भी स्थिर
ऐसे किस देवता कि उपासना करे हम अवि देकर
गर्भ में अपने अग्नी धारण कर
पैदा कर्व्यपा था जल इधर उधर नीचे ऊपर
जगह चुके वो का एकमेव प्रान बंकर
ऐसे किस देवता कि उपासना करे हम अवि देकर
ॐ ! सृष्टी निर्माता स्वर्ग रचायता पूर्वज रख्सा कर
सत्य धर्मं पलक अतुल जल नियामक रक्षा कर
फैली हैं दिशाएं बहु जैसी उसकी सब में सब पर
ऐसी ही देवता कि उपासना करे हम अवि देकर
ऐसी ही देवता कि उपासना करे हम अवि देकर....


Lyrics Of The Title Track of Bharat Ek Khoj

6 comments:

  1. incomplete lyrics.
    http://www.youtube.com/watch?v=xoiEJQUCxxs

    ReplyDelete
  2. The wording and translation given on this website is full of errors. It seems that the website owner has copy-pasted it from somewhere because many websites give identical errors.

    A reasonably accurate wording (Hindi lyrics) is given on this website http://archive.prahaar.in/collag/69217.txt

    With minor corrections it should read as below:

    सृष्टी से पहले सत् नहीं था
    असत् भी नहीं
    अन्तरिक्ष भी नहीं
    आकाश भी नहीं था
    छिपा था क्या?
    कहाँ?
    किसने ढका था?
    उस पल तो
    अगम अतल जल भी कहाँ था? ।।१।।

    नहीं थी मृत्यू
    थी अमरता भी नहीं
    नहीं था दिन
    रात भी नहीं
    हवा भी नहीं
    साँस थी स्वयमेव फिर भी
    नही था कोई कुछ भी
    परमतत्त्व से अलग या परे भी ।।२।।

    अंधेरे में अंधेरा-मुँदा अँधेरा था
    जल भी केवल निराकार जल था
    परमतत्त्व था सृजन-कामना से भरा
    ओछे जल से घिरा
    वही अपनी तपस्या की महिमा से उभरा ।।३।।

    (The stanza number 3 above is not heard in all the versions but is there in the original rendering.)

    परम मन में बीज पहला जो उगा
    काम बनकर वह जगा
    कवियों ग्यानियों ने जाना
    असत् और सत् का निकट संबंध पहचाना ।।४।।

    फैले संबंध के किरण धागे तिरछे
    परमतत्त्व उस पल ऊपर या नीचे?
    वह था बँटा हुआ
    पुरुष और स्त्री बना हुआ
    ऊपर दाता वही भोक्ता
    नीचे वसुधा स्वधा
    हो गया ।।५।।

    सृष्टी यह बनी कैसे?
    किससे?
    आई है कहाँ से?
    कोई क्या जानता है?
    बता सकता है?
    देवताओं को नहीं ग्यात
    वे आए सृजन के बाद
    सृष्टी को रचां है जिसने
    उसको जाना किसने? ।।६।।

    सृष्टी का कौन है कर्ता?
    कर्ता है वा अकर्ता?
    ऊँचे आकाश में रहता
    सदा अध्यक्ष बना रहता
    वही सचमुच में जानता
    या नहीं भी जानता
    है किसी को नहीं पता
    नहीं पता
    नहीं है पता ।।७।।

    ReplyDelete

  3. See these link and get more information about your blog..
    http://bjpsanjaysingh.blogspot.in/2015/04/normal-0-false-false-false-en-us-x-none.html
    http://bjpsanjaysingh.blogspot.in/2015/02/blog-post_20.html
    http://bjpsanjaysingh.blogspot.in/2015/02/blog-post_18.html
    http://bjpsanjaysingh.blogspot.in/2015/02/blog-post_3.html
    http://bjpsanjaysingh.blogspot.in/2015/01/bjp-ideologue-ideologue-and-teacher.html

    ReplyDelete
  4. Thanks for sharing in detail. Your blog is an inspiration! Apart of really useful tips, it's just really ! This post will be effectively Just about everything looks good displayed. Google seo service share diffrent types of blogs realted SEO ,SMO linkbuilding etc. SEO blog, SEO services, SEO tips, Google seo services, Top seo blog.

    ReplyDelete
  5. I’ve bookmarked your site and I’m adding your RSS feeds to my Google account.
    Google seo services

    ReplyDelete

Labels

Autobiographical (95) Cinema (71) ITBHU (64) India (55) Religion (51) Education (46) Development (36) Economy (34) Society (34) Literature (29) Culture (26) Politics (24) Quotations (23) Ten Issues (23) Blog (22) Democracy (19) Reading (19) Technology (19) Caste (18) Human Rights (17) Creative Writing (16) Cricket (16) Lyrics of life (16) My Poems (15) Speech (15) Kanpur (14) Philosophy (14) Thinking (14) Interview (13) Rare Moments (13) Revolution (13) B Tech - 7th Semester (12) State (12) Yatra Vritaant (12) Adaptation (11) Corruption (11) History (11) Media (11) Music (11) Censor (10) Journalism (10) Naxal (10) U.S.A. (10) Arabs (9) Banaras Hindu University (9) Life (9) Poverty (9) Rural (9) Spiritualism (9) Creativity (8) Not Original Reviews (8) Pakistan (8) XIMB (8) B Tech - 8th Semester (7) CSC (7) Free Speech (7) IIT (7) Internet (7) Justice (7) Nature (7) TED (7) Television (7) Agriculture (6) B Tech - 2nd Semester (6) Career (6) Feminism (6) Migrants (6) Personality (6) Poetry (6) Azamgarh (5) Violence (5) Wikileaks (5) Authority (4) B Tech - 1st Semester (4) Bureaucracy (4) Engineering (4) Food (4) Protest (4) Summer Internship (4) Summer Internship-2007 (4) Wisdom (4) B Tech - 6th Semester (3) Finance (3) IP Rights (3) Information (3) Innovation (3) Knowledge Management (3) Language (3) Mechanical Engineering (3) Microfinance (3) Mythology (3) Science (3) health (3) Afghanistan (2) Bhojpuri (2) Children (2) Communism (2) Corporate (2) Death (2) Design (2) IRMA (2) Identity (2) Love (2) Maths (2) Networking (2) Prose (2) Racism (2) Ragging (2) Reservation (2) Satire (2) Software (2) Urban (2) What a wonderful world (2) Argentina (1) Award (1) BT (1) BigThink (1) Cambodia (1) Child Abuse (1) China (1) Climate Change (1) Comics (1) Doctors (1) Documentary (1) EC (1) Election (1) Environment (1) Government (1) Green Earth (1) Hinduism (1) IIM (1) Idea (1) Individual (1) Industry (1) Iran (1) Kashmir (1) Kerala (1) Nanital (1) Nationalism (1) Police (1) RTI (1) Reality (1) Refugee (1) Social Networking (1) South Africa (1) Story (1) Tibet (1) UID (1) Varanasi (1) War (1) Weavers (1)