Lyrics of Title Song from Bharat Ek Khoj
सृष्टी से पहले सत्य नहीं था, असत्य भी नहीं अंतरिक्ष भी नहीं, आकाश भीं नहीं था छिपा था क्या कहाँ, किसने देखा था उस पल तो अगम, अटल जल भी कहाँ था सृष्टी का कौन हैं कर्ता कर्ता हैं यह वा अकर्ता ऊंचे आसमान में रहता सदा अध्यक्ष बना रहता वोहीं सच मुच में जानता. या नहीं भी जानता हैं किसी को नहीं पता नहीं पता नहीं है पता, नहीं है पता........... वोह था हिरान्य गर्भ सृष्टी से पहले विद्यमान वोही तो सारे भूत जात का स्वामी महान जो है अस्तित्वमाना धरती आसमान धारण कर ऐसे किस देवता कि उपासना करे हम अवि देकर जिस के बल पर तेजोमय है अम्बर पृथ्वी हरी भरी स्थापित स्थिर स्वर्ग ओर सूरज भी स्थिर ऐसे किस देवता कि उपासना करे हम अवि देकर गर्भ में अपने अग्नी धारण कर पैदा कर्व्यपा था जल इधर उधर नीचे ऊपर जगह चुके वो का एकमेव प्रान बंकर ऐसे किस देवता कि उपासना करे हम अवि देकर ॐ ! सृष्टी निर्माता स्वर्ग रचायता पूर्वज रख्सा कर सत्य धर्मं पलक अतुल जल नियामक रक्षा कर फैली हैं दिशाएं बहु जैसी उसकी सब में सब पर ऐसी ही देवता कि उपासना करे हम अवि देकर ऐसी ही देवता कि उपासना करे हम अवि देकर......



Comments
i just want to comment by these Khalil jibran's line
"Who is he that shall bring you to judgement if you tear off your garment yet leave it in no man's path?"
"what laws shall you fear if you dance and stumble against no man's iron chains?"
Kahlil gibran was like voice of god for all of us, only few understabd it.It makes me sad.