एक बूँद सहसा उछली

यायावर में कोई आत्मावसाद नही है। भीतर उमडे हुए करुण भाव को अपने ही पर ढलकर वाह कारुन्य का अप्व्यय नही करेगा...केवल गहरा स्पन्दन्शील अकेलापन, जिसमे संवेदना की अतिरिक्त सजगता है, मन मानो जड़ है । देखना है, सुनना है, घ्रान है, स्पर्श है- सभी कुछ है, किन्तु नही है चिन्तन वहाँ सतह पर आ गया है और भीतर केवल सन्नाटा है।

Comments

What are people reading?

Lyrics of Title Song from Bharat Ek Khoj

Kanpur Coaching Gurus

Kanpur Coaching Mandi

Title songs of Old Doordarshan Serials

दूरदर्शन के यादगार कार्टून: DD1 और DD2 के बच्चों वाले सुनहरे दिन