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Showing posts with the label Nostalgia

90s का VCR और कैसेट युग

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एक दौर था जब सिनेमा हमारे कपड़ों, हेयरस्टाइल, बोलचाल और सपनों तक को तय करता था।  सिनेमा तब सिर्फ मनोरंजन नहीं था, वह जीवन-शैली था।  आज सब कुछ मोबाइल में है—गाने, फिल्में, रील, शॉर्ट्स, OTT, YouTube, Spotify। लेकिन 80s-90s के उस दौर में एक गाना सुनना, एक फिल्म देखना, एक कैसेट खरीदना या VCR पर रातभर फिल्म देखना अपने-आप में उत्सव था। उस दौर की यादें धुंधली जरूर हैं, लेकिन उनमें जो मिठास है, वह आज की HD दुनिया में भी नहीं मिलती।  एक धुंधली सी याद है  गानों  की… कुछ गाने ऐसे होते हैं, जो सिर्फ कानों में नहीं बजते—वे आदमी को उसके बचपन में वापस ले जाते हैं। किसी पुराने गाने को 2026 में सुनते हुए अचानक लगता है कि हम चालीस साल पीछे पहुंच गए हैं। वही पान की दुकान, वही बस का सफर, वही बाजार की चहल-पहल, वही टेप रिकॉर्डर की खरोंच वाली आवाज़, वही शादी-ब्याह की रातें। बचपन में इस तरह के गाने VCR पर देखे जाते थे। शादी-विवाह में जब VCR चलता था, तो अक्सर “ नागमणि ” जैसी फिल्में लगती थीं। पूरा गांव या मोहल्ला जुट जाता था। उस समय किसी घर में टीवी होना ही बड़ी बात थी। गांव में टीवी ह...

Doordarshan Classics: A–Z Master List of Iconic TV Serials & Shows

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Afsane — यह संवेदनशील ड्रामा-सीरियल चिट्ठियों और उनसे जुड़ी मानवीय कहानियों के ज़रिए रिश्तों, संघर्षों और समाज की परतें खोलता है। Ajnabi — यह एक गंभीर ड्रामा-सीरीज़ थी जो जम्मू-कश्मीर की पृष्ठभूमि में सैनिक जीवन, आतंकरोधी संघर्ष और उससे प्रभावित इंसानी रिश्तों को दिखाती है। Akbar The Great — यह भव्य ऐतिहासिक धारावाहिक मुगल सम्राट अकबर के जीवन, शासन, युद्धनीति और राजनैतिक दृष्टि को नाटकीय रूप में प्रस्तुत करता है। Alif Laila — यह ‘Arabian Nights’ पर आधारित जादुई-फैंटेसी शृंखला थी, जिसमें शहेरज़ाद की कहानियों के जरिए रोमांच, जादू, जिन्न और लोककथाओं की दुनिया जीवंत होती है। All the Best — यह DD Metro का हल्का-फुल्का comedy show/sitcom था, जो एक middle-class family की रोज़मर्रा की घटनाओं को हास्यपूर्ण अंदाज़ में पेश करता था। Amravati Ki Kathayein — यह श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित anthology series थी, जो आंध्रप्रदेश के अमरावती गाँव के लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी के छोटे-छोटे मगर गहरे मानवीय प्रसंगों को उभारती है। Bante Bigadte — यह एक मनोरंजक पारिवारिक कॉमेडी-ड्रामा था, जिसमें झां...

1990s की हिंदी कॉमिक्स सुपरहीरोज़

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सूचना: तीन ताल पॉडकास्ट से इंस्पायर्ड और  नॉस्टैल्जिक  होकर मैं 90s को लिख रहा हूं। 90s नॉस्टैल्जिया: एंटीना, केबल और एक पूरा बचपन नामक ब्लॉग पोस्ट पहले भी लिखा है और आगे भी ९० के दशक ( अपने बचपन) को  कलमबद्ध करने का इरादा है | *90s की यादों में और डूबना है, तो यहाँ और नॉस्टैल्जिया पोस्ट्स पढ़ें। 90 के दशक की हिंदी कॉमिक्स बच्चों और किशोरों की पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ उनकी कल्पनाशील दुनिया का अहम हिस्सा थीं।  यह याद आता है कि कोई दोस्त कॉमिक्स पढ़ने के लिए दे देता है, लेकिन स्कूल बैग से कॉमिक्स चुरा ली जाती हैं; जब मुझको और दोस्त को इस बात का पता चला, तो दोनों आहत होकर रो पड़े। राज, डायमंड, तुलसी, मनोज और इंद्रजाल जैसे ब्रांडों ने सैकड़ों चरित्रों की परिघणा खड़ी की — सुपरपावर, जासूसी, जादू, लोककथात्मक तत्व और नैतिकता से जुड़े बेहतरीन मिश्रण के साथ। इन कॉमिक्स ने न केवल मनोरंजन दिया बल्कि पाठक समुदायों में साझा संस्कृति, किराये पर किताबों की परंपरा और लोककथाओं के नये रूपों को भी जन्म दिया। इस लेख में मैं उन प्रमुख ब्रांड्स, मुख्य पात्रों, विषय-रुझानों और सामाजिक प्रभावो...

90s नॉस्टैल्जिया: एंटीना, केबल और एक पूरा बचपन

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90 के दशक की केबल-टीवी वाली ज़िंदगी आज सोचें तो किसी अलग ही दुनिया जैसी लगती है। एक ही टीवी पर रूसी कार्टून, चीनी धारावाहिक, दूरदर्शन के कार्यक्रम और बीच-बीच में 8-बिट वीडियो गेम की आवाज़ — सब कुछ बिना इंटरनेट के। न वाई-फाई था, न स्मार्टफोन, फिर भी दुनिया हमारे घर तक पहुँच जाती थी… बस एक टेढ़े-मेढ़े टीवी एंटीना के सहारे। बचपन से ही दूरदर्शन पर हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड का सीधा प्रसारण देखता आ रहा हूं।  भाई, आज न जाने कैसे एंटीना सही करने का पुराना जादू याद आ गया? 90 के दशक में टीवी देखने का मज़ा ही कुछ और था| पहले तो हम DD National और DD Metro के भक्त हुआ करते थे।  रामायण दोबारा देखने में भी गर्व होता था।  एंटीना को घुमाकर और केबल का सिग्नल ठीक करने की कोशिश अपने आप में एक  गेम जैसी होती थी।  और उसी भरोसे में हमारा बचपन दुनिया घूम आता था — बस केबल के सहारे। दूरदर्शन के बाद प्राइवेट चैनलों के आने का इंतज़ार ही सबसे बड़ी एक्साइटमेंट हुआ करता था।  वो दौर जब “केबल कनेक्शन” लगना किसी स्टेटस सिंबल से कम नहीं था। मोहल्ले की किसी छत पर जैसे ही नया केबल ...

Search for Lost Stories of Childhood

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I am turning 40 in the next few months. So much has been lost in the debris of time and yet inscribed in the memories.  It is a travesty that we remember milestones yet forget the simpler times of childhood. I am suddenly experiencing a mixture of melancholy and nostalgia for the old DD serials, movies, and cartoons.  R ooted in memory, these shows have evoked in me the warmth of simpler times. I have renewed appreciation for the value of what was once overlooked or forgotten. Various forums on the internet fulfilled the curiosity but memories remain hidden and lapsed more quickly.  For adults who fondly remember the golden age of Doordarshan (DD) in the 1990s, the program lineup was a delightful mix of intellect, comedy, and adventure.   I was  seeing the world through the eyes of a child alive to its sensations yet protected from reality. I will mention a few DD programs forgotten or less remembered among people nowadays.    One such g...

Personal Reading History -2

‘Time, like a fistful of sand, slips through our fingers while we stand and wonder what to do with it.’ A habit is must for proper utilization of the time during our growing years. I had a nice habit of book and comics reading from the childhood days. I have already written a brief about reading history in a previous post ( Personal Reading History -1 ). In retrospection, it feels great that I have read so many books, comics, stories and poems. I want to read with the growing age the best of all world literature. It varies with the short stories of Anton Chekhov, Guy De Maupassant, Somerset Maugham, Tolstoy, Oscar Wilde and O Henry. UP, CBSE and ICSE board short stories and in English and Hindi from class 5th to 12th were fondly read by me. Smriti by Sriram Sharma , Gift of the Magi by O Henry, The Model Millionaire by Oscar Wilde, Idgaah by Premchand and A Letter to God by Gregorio Lopez y Fuentes (Translated by Donald A. Yates) are still mine favorite stories. Books Read at f...