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4th Letter to Teen Taal (तीन ताल को चौथा ख़त लिखा )

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तीन ताल के सभी साथियों को जय हो, जय हो, जय हो! मेरी चौथी चिट्ठी आप सबके मानसिक स्वास्थ्य को समर्पित है!  किसी तीन तालिये  ने कहा था "तीन ताल के घाट पे, भईया, बकबक की भीड़, गपशप के लिए जुट गए, राजा, रंक, फकीर" ! राजा, रंक, फकीर के साथ इस बार कुछ लिबरल्स ने तीन ताल को सुना। उनको बहुत बहुत साधुवाद।  यह विविधता हमारे समाज की जटिलता को दर्शाती है, जहाँ हर आवाज़, चाहे वह राजा हो या आम आदमी, संवाद की साझा धुन में एक साथ जुड़ती है। आज मैं  बात करूँगा उस चउतरफा चर्चा की, जहां मानसिक स्वास्थ्य की व्यथा और चिंतन ने ताऊ-वादी दर्शन और उदारवादी विचारों के बीच टकराव को जन्म दिया!  कमलेश ताऊ, आसिफ़ ख़ांचा और कुलदीप सरदार मेंटल हेल्थ पर चर्चा कर रहे थे  और  ताऊ ने  दीपिका पादुकोण को भारत की पहली मेंटल हेल्थ एम्बेसडर बनाए जाने पर तंज कसा कि यह सब एक बड़प्पन दिखाने का तरीका है, और थेरेपी को अमीरों का स्टेटस सिंबल बताया। इससे सोशल मीडिया पर लोग इतने खफा हुए जैसे किसी ने रंगदारी नहीं दिया हो! लिबरल्स ने शर्मनाक घोषित क़िया, एपिसोड कैंसिल कराने और बायकॉट की धमकी ...

3rd Letter to Teen Taal (तीन ताल को तृतीय ख़त)

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तीन ताल के सभी साथियों को जय हो, जय हो, जय हो!  छः संख्या भारतीय मिथकों में पूरापन और संतुलन का निशान मानी जाती है। तीन ताल की छटा छः ऋतुओं  से बनती है जिसे ये छह महानुभाव बनाते हैं - कमलेश ताऊ, कुलदीप सरदार, आसिफ़ खान चा, पाणिनि बाबा, जमशेद भाई और संयोजक अतुल जी| इन सभी को मेरा नमन!   तीन ताल क्यों सुने ? नए श्रोता लोगों से बस कहना चाहूंगा कि तीन ताल का भौकाल एकदम टाइट है क्यूंकि जिस ज़माने में जुबान और उसूल की कोई कीमत नहीं रही, वहां तीन ताल उसी ज़माने की छोटी-छोटी परेशानियों, समाज, राजनीति, और निजी अनुभवों पर खुलकर और दिलचस्पी से बातचीत करता है! ये चिठ्ठी पीर बाबा के दमके हुए पानी का लाइट मोड अर्थात बीयर पीकर लिख रहा हूं, जो लिखूंगा वह सच लिखूंगा, सच के सिवा कुछ नहीं  लिखूंगा। खबर ड्रोन की तरह उड़ते उड़ते पता चली की  लखनऊ की धरती  पर  तीन  ताल  के  महारथी  लोगों  का  ज़मावड़ा  होने वाला है ! लखनऊ की  जनता  की  किस्मत  से  रस्क  करते  करते, उनको  बहुत  बधाई. फिर मन...

2nd Letter to Teen Taal (तीन ताल को द्वितीय ख़त)

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तीन ताल के सभी साथियों को जय हो, जय हो, जय हो!  कमलेश ताऊ, कुलदीप सरदार और आसिफ़ खान चा को मेरा नमन!  "जस मतंग तस पादन घोड़ी, बिधना भली मिलाई जोड़ी" — ये लोक कहावत का आशय है कि जैसे हाथी को उसके पांव के अनुसार घोड़ी मिलनी चाहिए, उसी तरह विधाता समान लोगों की जोड़ी बना देता है। मेरे जैसे काम में उलझे हुए लोगों का तीन ताल का दर्शक बनना सुंदर संयोग है !   मेरे में लखनऊ की किस्सागोई नहीं है ना ही है हरियाणा का ठेठ अंदाज़ ! पर १०० -२००  घण्टे सुनते सुनते लिखने का मन हो ही गया। परसाई जी की बात याद आयी : जो प्रेमपत्र में मूर्खतापूर्ण बातें न लिखे, उसका प्रेम कच्चा है, उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए पत्र जितना मूर्खतापूर्ण हो, उतना ही गहरा प्रेम समझना चाहिए।  अतः बहुत प्रेम से   तीन ताल को लिखा प्रथम ख़त  लिखा जो प्रोग्राम में पढ़ा नहीं गया, ना जाने किस गलियारों में खो गया। मन में बहुत तीस उठी। कई लेखक मानते हैं कि संपादकीय अस्वीकृति व्यक्तिगत पसंद या बाजार की मांग के कारण होती है, पर मुझ नौसिखिए को पता है कि यह अस्वीकृत चिठ्ठी में बकैती की कमी...

Letter to Teen Taal (तीन ताल को ख़त लिखा)

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तीन ताल  के सभी साथियों को जय हो! जय हो जय हो! कमलेश ताऊ, कुलदीप सरदार और आसिफ़ खान चा को मेरा नमन! मेरा मुकाम शहर दिल्ली है और जड़ें आजमगढ़ से जुड़ी हैं। मेरे लिए 'तीन ताल' की चर्चा व्यंग्य, ज्ञान और पुरानी यादों की एक त्रिपथगा है। एक-एक एपिसोड अलग-अलग रंगों से भरा रहता है—कभी पाणिनी बाबा की विद्वता झलकती है, कभी नास्त्रेदमस जैसा सत्य कहने वाले ताऊ हमें चौंका देते हैं, तो वहीं रोमांटिक खान चा अपनी नजाकत और मोहब्बत भरे लहजे से दिल जीत लेते हैं। कुलदीप का संचालन पूरे पॉडकास्ट को एक अलग चमक देता है।   इन एपिसोड्स में Bizzare उत्तेजक खबरों से लेकर भू-राजनीतिक (geopolitical) विश्लेषण, और स्थानीय—पूर्वांचल, पटना, वाराणसी, कानपुर, इलाहाबाद, दिल्ली, नोएडा, लखनऊ और भोपाल तक की घनघोर चर्चाएं सुनना अद्भुत अनुभव है। ऐसा लगता है जैसे छोटी-बड़ी सारी दुनिया तीन ताल की जमघट पर सिमट आई हो। सिनेमा, पुराने गाने और दुध्दी के किस्से तो खान चा की स्पेशलिटी उभार लाते हैं। जब-जब सरपंच और अन्य मेहमान इसमें जुड़ते हैं, चौपाल का मज़ा कई गुना बढ़ जाता है।   हमारे जीवन में काम, आलस्य और आर...