90s नॉस्टैल्जिया: एंटीना, केबल और एक पूरा बचपन
90 के दशक की केबल-टीवी वाली ज़िंदगी आज सोचें तो किसी अलग ही दुनिया जैसी लगती है। एक ही टीवी पर रूसी कार्टून, चीनी धारावाहिक, दूरदर्शन के कार्यक्रम और बीच-बीच में 8-बिट वीडियो गेम की आवाज़ — सब कुछ बिना इंटरनेट के। न वाई-फाई था, न स्मार्टफोन, फिर भी दुनिया हमारे घर तक पहुँच जाती थी… बस एक टेढ़े-मेढ़े टीवी एंटीना के सहारे। 90 के दशक में टीवी देखने का मज़ा ही कुछ और था | पहले तो हम DD National और DD Metro के भक्त हुआ करते थे। रामायण दोबारा देखने में भी गर्व होता था। एंटीना को घुमाकर और केबल का सिग्नल ठीक करने की कोशिश अपने आप में एक गेम जैसी होती थी। और उसी भरोसे में हमारा बचपन दुनिया घूम आता था — बस केबल के सहारे। दूरदर्शन के बाद प्राइवेट चैनलों के आने का इंतज़ार ही सबसे बड़ी एक्साइटमेंट हुआ करता था। वो दौर जब “केबल कनेक्शन” लगना किसी स्टेटस सिंबल से कम नहीं था। मोहल्ले की किसी छत पर जैसे ही नया केबल एंटीना दिखता, खबर अपने-आप फैल जाती — “अरे, इनके घर तो अब सारे चैनल आने वाले हैं!” शाम होते ही बच्चे वहीं जमा, रिमोट हाथ में लेने की बारी को लेकर बहस, और चैनल ब...