1990s की हिंदी कॉमिक्स सुपरहीरोज़
सूचना: तीन ताल पॉडकास्ट से इंस्पायर्ड और नॉस्टैल्जिक होकर मैं 90s को लिख रहा हूं। 90s नॉस्टैल्जिया: एंटीना, केबल और एक पूरा बचपन नामक ब्लॉग पोस्ट पहले भी लिखा है और आगे भी ९० के दशक ( अपने बचपन) को कलमबद्ध करने का इरादा है |
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90 के दशक की हिंदी कॉमिक्स बच्चों और किशोरों की पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ उनकी कल्पनाशील दुनिया का अहम हिस्सा थीं। यह याद आता है कि कोई दोस्त कॉमिक्स पढ़ने के लिए दे देता है, लेकिन स्कूल बैग से कॉमिक्स चुरा ली जाती हैं; जब मुझको और दोस्त को इस बात का पता चला, तो दोनों आहत होकर रो पड़े।
राज, डायमंड, तुलसी, मनोज और इंद्रजाल जैसे ब्रांडों ने सैकड़ों चरित्रों की परिघणा खड़ी की — सुपरपावर, जासूसी, जादू, लोककथात्मक तत्व और नैतिकता से जुड़े बेहतरीन मिश्रण के साथ। इन कॉमिक्स ने न केवल मनोरंजन दिया बल्कि पाठक समुदायों में साझा संस्कृति, किराये पर किताबों की परंपरा और लोककथाओं के नये रूपों को भी जन्म दिया। इस लेख में मैं उन प्रमुख ब्रांड्स, मुख्य पात्रों, विषय-रुझानों और सामाजिक प्रभावों का समग्र विवेचन कर रहा हूँ।
राज कॉमिक्स
राज कॉमिक्स 1980s–90s के दशक में सबसे बड़ी और प्रभावशाली पब्लिशिंग हाउसों में से एक था। भारतीय सुपरहीरो के पिता कहे जाने वाले संजय गुप्ता ने सुपरहीरो किरदारों को बनाया। यहाँ 50 से अधिक पात्र जन्मे, जिनमें कुछ ब्रह्मांड-रक्षक टीम के प्रमुख थे—नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव जैसे नायकों ने पाठकों के बचपन पर लंबे समय तक कब्ज़ा जमाया।
- नागराज: बग़ाकू, जादूगर शाकुरा, शंकर शहंशाह, मिस्स किलर, तुतेंतु, नागपाशा और थोडांगा जैसे दानवों के चिर-शत्रु; विसर्पी की शादी में मुख्य अतिथि; सुपर कमांडो ध्रुव के परम सखा और नागदन्त के डॉपलगेंगर — मानवता का एक अटूट रक्षक। सर्प-आधारित शक्तियाँ, विष-उत्सर्जन, सुपर स्ट्रेंथ और अक्सर लोक-आध्यात्मिक संदर्भ; नागद्वीप जैसे काल्पनिक जगहों और वैश्विक यात्राओं (अफ्रीका, मध्य पूर्व, अमेरिका) में नागराज की कहानियाँ दिखतीं। नागराज की पृष्ठभूमि और गुरु या रहस्यमय मार्गदर्शक के रूप में बाबा गोरखनाथ जैसा तत्व भी कई कथाओं में दिखाई देता है।
- सुपर कमांडो ध्रुव: अपनी बुद्धिमत्ता, मार्शल आर्ट्स और दृढ़ संकल्प से राजनगर के अपराध को ख़त्म करने वाला, नागराज का परम सखा; ग्रैंड मास्टर रोबो, चंडकाल, महामानव, डॉक्टर वायरस, ध्वनिराज, चुंबा, बाउना वामन, वीडियो विलेन जैसे दरिंदों के चिर-शत्रु; जानवरों से संवाद, और सुपरपॉवरों के बिना भी भारत का सबसे लोकप्रिय सुपरहीरो
- डोगा: एक सर्कस पृष्ठभूमि वाला किरदार जो कुत्ते जैसी परिस्थितिजन्य शक्तियों के साथ अपराध से लड़ता है; इसमें अंधाधुंध हिंसा और नैतिक जटिलताएँ भी देखी जाती हैं। आम तौर पर डोगा की कॉमिक्स काफी वॉयलेंट और डार्क थीम के इर्द गिर्द होती थी| अदरक चाचा डोगा को मुंबई के रक्षक बनने के लिए ट्रेन करते थे। डोगा के चार गुरु हैं: अदरक चाचा (बॉक्सिंग), हल्दी चाचा (पहलवानी/कुश्ती), धनिया चाचा (मार्शल आर्ट्स), और काली मिर्च चाचा (शस्त्र/शूटिंग)।
- भोकाल: परलोक से आया राजकुमार ज्वाला तलवार जैसी शक्तियों सहित, लोककथात्मक एवं महाकाव्य तत्वों का मिश्रण। भोकल के दोस्त हैं: तुरीन (जिससे उसका प्यार है), शूतान, और अतिक्रूर।
- परमाणु: न्यूक्लियर उर्जा-आधारित सुपरहीरो, विज्ञान और शक्ति की टकराहट का प्रतिनिधित्व। परमाणु का असली नाम विनय है जो एक इंस्पेक्टर है, और उसका चाचा प्रोफेसर K.K. वर्मा वैज्ञानिक है जो उसे वंडरमैन सूट बनाकर परमाणु बना कर देते हैं।
तिरंगा: कैप्टन अमेरिका से इंस्पायर है — तिरंगा एक नॉर्मल ह्यूमन सोल्जर है जिसकी पावर उसकी स्किल्स और तिरंगा शील्ड से है जो छत्रपति शिवाजी की मूर्ति से टूटकर गिरी थी।
- भेड़िया: जंगल-आधारित योद्धा, भेड़िये की शक्ति और वन-आधारित मिथक।
- तिलस्मदेव: जादुई तिलस्मों को तोड़ने वाला जादूगर, जादू और रहस्यवादी कथानक।
- बांकेलाल: शापित तलवार और जोकर-जैसी शख्सियत — त्रासदिक कमिक रिलीफ का रोल। बंकलाल के हल्के-फुल्के, कभी-कभी अजीबो-गरीब संवाद पाठकों के बीच लोकप्रिय थे; एक यादगार लाइन के रूप में लोग उसे "वो मारा पापड़ वाले को!" के संदर्भ में याद करते हैं — जो उसके हास्य, गलतफहमी और अराजकता भरे दृश्य को दर्शाता है।
- अश्वराज, शुक्राल, शक्ति, तिरंगा, इंस्पेक्टर स्टील, एंथोनी, गगन, विनाशदूत, योद्धा, प्रचंडा — जैसे अन्य पात्रों ने दुनिया का विस्तार किया।
- राज कॉमिक्स के भीतर खास थीम्स — थ्रिल-हॉरर-सस्पेंस विशेषांक (उदा. एक कटोरा ख़ून ) या प्रयोगात्मक कांसेप्ट्स (त्रिकालदेव, थिम्पू आदि) भी देखे गए।
डायमंड कॉमिक्स
डायमंड कॉमिक्स (1978 से) ने अधिकतर जासूसी और हास्य-प्रधान पात्रों को प्रख्यात किया। प्राण कुमार शर्मा, जिन्हें सिर्फ़ “प्राण” के नाम से जाना जाता है, ने चाचा चौधरी और साबू जैसे लोकप्रिय किरदारों की रचना की, जो भारतीय कॉमिक की यादगार धड़कन बन गये| इनके किरदारों में रोज़मर्रा का ज्ञान, घरेलू बुद्धिमत्ता और हल्की-फुल्की रोमांचक कहानियाँ मिलती थीं।
- चाचा चौधरी: “दिमाग तेज़” के रूप में प्रसिद्ध; छोटू और विशालकाय सहायक साबू (बृहस्पति ग्रह से) के साथ क्लासिक टीम। जब साबू को गुस्सा आता है, तो कहीं ज्वालामुखी फटता है! राका एक अमर अपराधी है जो जब साबू को गुस्सा आता है, तो कहीं ज्वालामुखी फटता है! राका एक अमर अपराधी है जो चक्रमाचार्य की अद्भुत दवाई/इमोर्टेलिटी पोटियन पी लिया है।
- बिल्लू: मोहल्ले में, घर में समस्या का चतुराई से सामना करने वाला लड़का;
- पिंकी: पारिवारिक और बच्चों के लिए उपयुक्त।
अन्य लोकप्रिय दर्जे: अग्निपुत्र अभय, फौलादी सिंह, राजन-इकबाल, लंबू-मोटू जैसे चहल-पहल वाले चरित्र, पारिवारिक जोक्स और स्थानीय संदर्भों के साथ।
तुलसी कॉमिक्स
तुलसी कॉमिक्स ने पारंपरिक भारतीय पौराणिक और फैंटेसी तत्वों को सुपरहीरो फॉर्मेट में पिरोया। इन कहानियों में देवता-आधारित शक्तियाँ, जानवरों के अवतार और लोक-राक्षस शामिल थे।
- महाबली शाका: असुरनाशक देवता जैसा पावरहाउस।
- फाइटर टॉड: मेढक-आधारित सुपरहीरो, कराटे संबंधी शक्तियाँ।
- तौसी: विषैले साँपों की शक्तियों से लैस, तौसी छाँव‑छाँव में गुनाहियों के खिलाफ उठने वाला भारतीय “सर्प‑नायक” है।
- अंगारा: जानवरों के अंगों से बना यह “एको‑वॉरियर” प्रकृति और जीवजंतुओं की रक्षा के लिए लड़ता है।
- जंबो: साइबर‑रोबोट जंबो ताकत, टेक्नोलॉजी और विज्ञान के ज़रिए न्याय और सुरक्षा का प्रतीक बन जाता है।
- योगा: योगा गुस्से से भरा युवा हीरो है, जो अन्याय के खिलाफ जलती आग की तरह खड़ा होकर लड़ता है।
- योशो: आज़र की दुनिया से आया शक्तिशाली बालक योशो जो पृथ्वी लोक में भूमि पर आकर अपनी अद्भुत योग्यताओं से सबको चमत्कृत कर देता है
- जटायु: पक्षी-योद्धा, लोककथाओं से प्रेरित।
- भूतनाथ: “अच्छा भूत” — हल्की डरावनी पर कॉमिक-फ्रेंडली।
ये सभी चरित्र तालमेल में फैंटेसी और वीरता रखते थे।
मनोज कॉमिक्स
मनोज के पात्र अक्सर सशस्त्र, सैनिक और साहसिक रोमांच से जुड़े थे। उनका फोकस लड़ाइयों, आतंकवाद विरोधी अभियानों और देशभक्ति पर ज्यादा रहता था।
- कर्नल करण: हथियार विशेषज्ञ और सैन्य नेता।
- राम-रहीम: धर्मनिरपेक्षता के प्रतीक के रूप में दिये गये दो योद्धा-भाई; राम-रहीम का युग्म अक्सर धार्मिक सद्भाव के रूपक के रूप में लिया जाता था।
- क्रूकबॉन्ड, हवलदार बहादुर, टाइगर, भूतेश्वर (भूत योद्धा), युगांधर — विविध प्रकार के रोमांचकारी पात्र।
हारर में 'आंख से टपका ख़ून' बहुत फेमस हुई थी!
इंद्रजाल कॉमिक्स — विदेशी एम्पोरियम
इंद्रजाल, जिसका कलेक्शन अक्सर विदेशी अनुवादों और पाश्चात्य पात्रों का मिश्रण था, भारतीय पठन-संस्कृति के साथ ग्लोबल अवतार पेश करता था।
- फैन्टम: जंगल का रहस्यमयी योद्धा जिसे हिन्दी पाठकों ने "चलता-फिरता भूत" के रूप में याद किया; उसकी खोपड़ी-रिंग और लोक-ड्रामा ने उसे पहचान दिलाई।
- मांड्रेक: सम्मोहन करने वाला जादूगर (मैजिक-जादू का क्लासिक रूप)।
- फ्लैश गॉर्डन और अन्य पश्चिमी नायकों के अनुवादों ने स्थानीय पाठक-रस को अंतरराष्ट्रीय स्वाद दिया।
इंद्रजाल का स्वरूप जासूसी, जादू और विज्ञान-फाई के संगम पर आधारित रहता था।
अन्य पब्लिशर्स और क्रॉसओवर संस्कृति
सरिता, नूतन, किंग जैसे छोटे-मध्यम ब्रांड्स ने भी महत्वपूर्ण पात्र दिए — जैसे कप्तान राजू, पीतारा (विक्रम-बेताल प्रकार), नूतन का भूतनाथ आदि। कई बार पात्रों का क्रॉसओवर भी हुआ: एक ही चरित्र अलग-पब्लिशर के अंक में अतिथि रूप से दिखा करते थे।
कॉमिक्स और सामाजिक अर्थ

कॉमिक्स की लोकप्रियता ने उत्तर भारत में “किराये पर कॉमिक पुस्तकों” देने की संस्कृति को भी मजबूती दी। लगभग हर कस्बे और मोहल्ले में छोटी-छोटी लाइब्रेरीं थीं, जिनको अधिकांशतः कॉमिक प्रेमी संचालित करते थे। ये पुस्तकें आमतौर पर MRP के लगभग 10% (१-२ रूपये) किराये पर मिलती थीं और यह व्यवसाय मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए बेहद लाभदायक साबित हुआ। गर्मियों की छुट्टी मे कॉमिक की दुकान चलती थी और सभी बच्चे इसके लिए सिक्के जोड़ते थे| इसका सामाजिक प्रभाव यह था कि बच्चों को पढ़ने-समझने की आदत लाई गई, सामुदायिक बातचीत और साझा स्मृतियों का निर्माण हुआ।
"अग्निपुत्र अभय” जैसी कथाएँ जो सबसे पहले 1990 के दशक में राष्ट्रीय सहारा जैसे अखबार में प्रकाशित हुई थीं, बच्चों और युवा पाठकों पर काफ़ी गहरा प्रभाव पड़ा| यह सब नामांकित पात्र बच्चों के लिए एक आदर्श‑चित्र बन जाते हैं, जो अक्सर अन्याय, हिंसा और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होकर नैतिक कार्य करते हैं।
नागराज, ध्रुव और भोकाल के मेग्नेट स्टिकर उनके यादगार पोज़ और लोगो को छोटे, चमकदार रूप में कैद करते हैं; इन्हें फ्रिज, नोटबोर्ड या लोहे की सतहों पर सजाया जाता था। उस समय Big Babool के 5 रुपये के पैक में अक्सर फ्री मिनी कॉमिक बुक्स मिलते थे, जिससे बच्चों को नई कहानियाँ पढ़ने को मिल जाया करती थीं।
कॉमिक्स डाइजेस्ट के अंक न केवल मल्टी हीरो की कहानियों का संगम होता था और हर फ्रेम में जीता हुआ अनुभव है। और पाठक को एक विशाल, दिलकश संसार मिलता था।
सामान्य अनुभव और स्मृतियाँ
- कई इलाकों में कॉमिक्स के कहानियों का प्रभाव लोककथाओं और निजी रचनात्मकताओं में मिल जाता था—जैसे नागराज की कथाएँ बाबा गोरखनाथ या नागलोक जैसी कथाओं से जुड़ती हैं।
- यादगार डायलॉग और वाक्यांश: बांकेलाल जैसे किरदारों के हास्य संवाद और फैन्टम के लिए "चलता-फिरता भूत" जैसा उपनाम इन कहानियों की लोक-जनप्रियता को दर्शाते हैं।
- हिंदी कॉमिक्स के पात्र हमारे अंदर अच्छाई, दोस्ती और आपसी सम्मान की भावना जगाते थे। इसी संदर्भ में “राम और रहीम” जैसी अवधारणा या “राजन‑इकबाल” जैसे किरदार बच्चों के मन में साम्प्रदायिक सद्भाव और सेकुलर मूल्यों की गहरी छाप छोड़ते थे। ये कहानियाँ हमें सिखाती थीं कि इंसान की पहचान उसके धर्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म और उसके व्यवहार से होती है।
- हिंदी कॉमिक्स की इन कहानियों ने हमें सम्मान का महत्व समझाया—बड़ों का, दोस्तों का और हर व्यक्ति की पहचान का। दया और करुणा भी एक महत्वपूर्ण पहलू था—नायक सिर्फ़ ताकतवर नहीं होता था, बल्कि संवेदनशील भी होता था।
आधुनिक पुनरावृत्ति और डिजिटल उपलब्धता
कई पाठक आज भी इन पात्रों को याद करते हैं और पीडीएफ-आर्काइव, रीडिट जैसी जगहों पर पुराने अंकों की मांग देखते हैं। आर्काइव और पीडीएफ: बहुत सी पुरानी कॉमिक्स अब डिजिटल फ़ॉर्म में, स्कैन-आधार पर उपलब्ध हैं; यही कारण है कि 90s के एक बड़े हिस्से के पृष्ठ आज भी ऑनलाइन मिलते हैं। रीप्रिंट और रीमेक: कुछ चरित्र और नाम आज भी पुनः प्रकाशित या रिइमेजिन किए जा रहे हैं—यह दर्शाता है कि इन पात्रों की दीर्घजीविता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की संभावनाएँ अभी भी मौजूद हैं।
निष्कर्ष
90s की हिंदी कॉमिक इंडस्ट्री केवल बच्चों का मनोरंजन नहीं थी; यह सामुदायिक जुड़ाव, सांस्कृतिक लोकाचार और स्थानीय-वैश्विक कल्पनाओं का मिश्रण थी। राज, डायमंड, तुलसी, मनोज और इंद्रजाल जैसे प्रकाशकों के व्यापक पात्रों ने पाठकों के मानस-पटल पर गहरी छाप छोड़ी — नागराज और ध्रुव जैसी हीरो से लेकर चाचा चौधरी और साबू की बुद्धिमत्ता तक। 90s के बच्चे स्कूटर या वीडियो गेम के पीछे नहीं—कॉमिक्स की खुशबू में खोए रहते थे; अमर, ज़िंदादिल हीरो और नक़्क़ाशी भरी कहानियाँ उनकी दुनिया थीं| आज भी वही पन्ने पलटते हैं तो बचपन की हँसी, रंग-बिरंगे पेस्ट और अटकी हुई यादें ताज़ा हो जाती हैं।





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